ज्येष्ठ अमावस्या 2025: विष्णु चालीसा पाठ से पितरों की कृपा प्राप्त करें
जानिए ज्येष्ठ अमावस्या 2025 की तिथि, महत्व और पूजा विधि। विष्णु चालीसा का पाठ करके पितृ दोष से मुक्ति पाएं और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करें।

भारत में अमावस्या तिथि को धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत शुभ और प्रभावशाली माना गया है, विशेष रूप से जब बात पितरों की कृपा प्राप्त करने की हो। वर्ष 2025 में ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि मंगलवार, 27 मई को पड़ रही है। यह दिन विशेष रूप से पितरों की आत्मा की शांति, पितृ दोष निवारण, और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।
इस दिन यदि श्रद्धा और विधिपूर्वक विष्णु चालीसा का पाठ किया जाए, तो न केवल पितृ दोष से मुक्ति मिलती है बल्कि परिवार में सुख, शांति और समृद्धि भी आती है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व क्या है, पूजा की सही विधि क्या है और विष्णु चालीसा पाठ का क्या लाभ है।
ज्येष्ठ अमावस्या 2025: तिथि और मुहूर्त
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 26 मई 2025 को दोपहर 12:12 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त: 27 मई 2025 को सुबह 08:32 बजे
यह तिथि न केवल पितृ पूजन के लिए बल्कि शनि जयंती के कारण भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शनि का जन्म हुआ था, अतः इस दिन विष्णु भगवान और शनि देव दोनों की पूजा का विशेष महत्व है।
अमावस्या का महत्व – पितरों से जुड़ने का माध्यम
भारतीय परंपरा में यह माना जाता है कि पूर्वजों की आत्मा को संतोष देने हेतु अमावस्या तिथि सर्वोत्तम है। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन विशेष रूप से पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा है। इन कर्मों से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वे संतुष्ट होकर वंशजों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
पितृ दोष की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह दोष प्रायः उन लोगों को प्रभावित करता है जिनके पितरों की मृत्यु के बाद उचित कर्म नहीं किए गए हों या वे असंतुष्ट हों।
विष्णु चालीसा का महत्व
विष्णु चालीसा भगवान विष्णु की स्तुति में रचित चालीस चौपाइयों का संग्रह है, जिसमें भगवान की महिमा, स्वरूप, कार्य एवं लीलाओं का वर्णन है। इस चालीसा का पाठ न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है बल्कि आध्यात्मिक स्तर पर भी व्यक्ति को ऊर्जावान बनाता है।
इस दिन विष्णु चालीसा का पाठ करने से:
- पितृ दोष शांत होता है
- मन को संतुलन और शांति मिलती है
- भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है
- पितरों की आत्मा तृप्त होती है
- परिवार में सौहार्द बना रहता है
पूजा विधि: कैसे करें विष्णु चालीसा का पाठ
1. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
3. दीपक जलाकर, गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
4. पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, और फल अर्पित करें।
5. विष्णु चालीसा का पाठ श्रद्धा पूर्वक करें।
6. पाठ के बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
7. पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करें।
यदि संभव हो तो इस दिन ब्राह्मण को भोजन कराएं और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र अथवा दान दें।
शनि जयंती का योग – और भी बढ़ाता है इस दिन का महत्व
ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती भी होती है। शनि देव को भगवान विष्णु का ही एक रूप माना जाता है जो कर्मों के अनुसार फल देने वाले देवता हैं। यदि किसी की कुंडली में शनि संबंधित दोष हों या शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, तो इस दिन शनि पूजा और विष्णु चालीसा का पाठ बहुत लाभकारी होता है।
पिंडदान और तर्पण – आत्मा की शांति का मार्ग
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन गंगा, यमुना, नर्मदा या किसी पवित्र नदी में स्नान कर पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। अगर यह संभव न हो तो घर पर ही जल में तिल, काले तिल और कुश डालकर तर्पण कर सकते हैं।
व्रत और नियम
- इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को सात्विक आहार का सेवन करना चाहिए।
- ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन, वाणी व आचरण को पवित्र रखें।
- अगर महिलाएं वट सावित्री व्रत करती हैं, तो वे वट वृक्ष की पूजा करके पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
घर में सुख-शांति के लिए करें ये कार्य
- तुलसी के पौधे में दीपक जलाएं
- भगवद गीता का पाठ करें
- घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें
- जरुरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें
ज्येष्ठ अमावस्या से जुड़ी कुछ मान्यताएं
- पितृलोक का द्वार इस दिन खुला माना जाता है
- जो कार्य सालभर नहीं किए जाते, वे इस दिन अवश्य किए जाएं तो पुण्यदायक होते हैं
- इस दिन किया गया दान सौ गुना फल देता है
- जो व्यक्ति विधिपूर्वक पूजन करता है, उसे अपने पूर्वजों का प्रत्यक्ष आशीर्वाद प्राप्त होता है
ज्येष्ठ अमावस्या एक ऐसा अवसर है जब आप अपने पितरों को याद करके उन्हें श्रद्धांजलि दे सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। इस दिन विष्णु चालीसा का पाठ न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि पितृ दोष जैसी समस्याओं से भी मुक्ति दिलाता है। साथ ही, यह दिन शनि जयंती के कारण और भी अधिक शुभ हो जाता है। यदि आप इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-पाठ करते हैं, तो निश्चित ही आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होगा।
डिस्क्लेमर
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पुराणों और आम जनमान्यताओं पर आधारित है। कृपया किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को करने से पहले योग्य पंडित या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी देना है।